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🔥आदेश्वर पब्लिक स्कूल बना नवरात्रि गरबा और बतुकम्मा उत्सव का केंद्र🔥

🔥गरबा की धुन पर थिरके विद्यार्थी और अभिभावक, भारतीय संस्कृति एवं धार्मिक परंपराओं की दिखी अनूठी झलक🔥

बीजापुर।

नवरात्रि पर्व के अवसर पर पूरे बीजापुर जिले में भक्ति और उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है। गली-मोहल्लों में जहां मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित कर श्रद्धालु पूजा-अर्चना में जुटे हैं, वहीं शैक्षणिक संस्थानों में भी भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विविधता को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में आदेश्वर पब्लिक स्कूल नवरात्रि गरबा एवं बतुकम्मा उत्सव का आकर्षक केंद्र बना।

विद्यालय की डायरेक्टर अनमोल लुक्कड़ के मार्गदर्शन में स्कूल समिति द्वारा गरबा नृत्य एवं बतुकम्मा से जुड़ी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए पारंपरिक नृत्य के माध्यम से भारतीय संस्कृति और लोक परंपराओं की सुंदर झलक प्रस्तुत की। गरबा की लय और उत्सवी माहौल ने कार्यक्रम में शामिल लोगों का मन मोह लिया।

इस आयोजन की खास बात यह रही कि कार्यक्रम केवल विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अभिभावकों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। अभिभावकों ने गरबा नृत्य में शामिल होकर बच्चों का उत्साह बढ़ाया और उत्सव को सामूहिक सहभागिता का रूप दिया। विद्यालय परिसर में सांस्कृतिक उल्लास और आपसी मेलजोल का वातावरण देखने को मिला।

धार्मिक परंपराओं के साथ सांस्कृतिक विविधता का सम्मान

आदेश्वर पब्लिक स्कूल में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से भारतीय रीति-रिवाजों, पारंपरिक नृत्यों और सांस्कृतिक विरासत से विद्यार्थियों को परिचित कराने का प्रयास किया गया। गरबा जहां नवरात्रि की भक्ति और उत्साह का प्रतीक है,

वहीं बतुकम्मा तेलंगाना की प्रसिद्ध पुष्प-आधारित लोक परंपरा है,

जो प्रकृति, फूलों और सामुदायिक सहभागिता से जुड़ी हुई है।

विद्यालय में हिंदू रीति-परंपराओं के उत्सव के साथ सभी धर्मों के प्रति सम्मान की भावना को महत्व देने का संदेश भी सामने आया। ऐसे सांस्कृतिक आयोजन विद्यार्थियों में अपनी परंपराओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ विभिन्न संस्कृतियों को समझने, उनका सम्मान करने और सामूहिक रूप से उत्सव मनाने की प्रेरणा देते हैं।

आदेश्वर पब्लिक स्कूल में आयोजित गरबा एवं बतुकम्मा उत्सव ने नवरात्रि के उल्लास को सांस्कृतिक रंगों से सराबोर कर दिया।

विद्यार्थियों और अभिभावकों की सहभागिता ने यह संदेश दिया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं, बल्कि बच्चों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना और उनमें आपसी सम्मान एवं सामाजिक समरसता की भावना विकसित करना भी है।

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