🔥राउत पारा में 30 वर्षों से विराज रही मां दुर्गा, भक्ति और आस्था का उमड़ता है सैलाब🔥
🔥संध्या आरती के बाद महाप्रसाद बना विशेष आकर्षण, प्रसाद पाने के लिए घंटों कतार में खड़े रहते हैं श्रद्धालु🔥
बीजापुर।
शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर बीजापुर के राउत पारा में मां दुर्गा की आराधना को लेकर भक्तिमय माहौल बना हुआ है। यहां नवरात्रि केवल पूजा-पाठ का पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, आपसी सहयोग और सामूहिक आस्था का प्रतीक भी बन चुका है। मां दुर्गा के आगमन से पहले ही राउत पारा के युवाओं, बुजुर्गों और सियान वर्ग में खासा उत्साह देखने को मिलता है। इस आयोजन में हर वर्ग और समुदाय के लोग बढ़-चढ़कर सहयोग करते हैं।
🔥30 वर्षों से चली आ रही परंपरा🔥
राउत पारा में मां दुर्गा की स्थापना की परंपरा करीब 35 वर्षों से लगातार निभाई जा रही है। हर वर्ष श्रद्धा और उत्साह के साथ मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना, आरती और अन्य धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। नवरात्रि के दौरान पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में सराबोर नजर आता है। श्रद्धालु माता के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और क्षेत्र की खुशहाली की कामना करते हैं।
🔥संध्या आरती के बाद महाप्रसाद का विशेष आकर्षण🔥
राउत पारा दुर्गोत्सव की खास पहचान संध्या आरती के बाद वितरित होने वाला माता का प्रसाद है। आयोजन के पहले दिन से ही श्रद्धालुओं को कभी पूरी-हलवा तो कभी माता का प्रिय माने जाने वाला खिचड़ी प्रसाद वितरित किया जाता है। प्रसाद ग्रहण करने के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगती हैं। माता के प्रति श्रद्धा ऐसी कि श्रद्धालु घंटों इंतजार करने के बाद भी प्रसाद ग्रहण किए बिना लौटना नहीं चाहते।
यह दृश्य आयोजन की लोकप्रियता और भक्तों की अटूट आस्था को दर्शाता है। प्रसाद वितरण के दौरान श्रद्धालुओं की सहभागिता से पूरा परिसर धार्मिक उत्साह से भर उठता है।
🔥हवन, कन्या भोज के बाद शुरू होता है भंडारा🔥
नवरात्रि के समापन अवसर पर हवन के पश्चात नौ कन्याओं को भोजन कराया जाता है। इसके बाद भंडारे का आयोजन किया जाता है, जिसमें बीजापुर के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचकर माता का प्रसाद ग्रहण करते हैं। आयोजकों के अनुसार, भंडारा देर रात लगभग 11 बजे तक चलता है। इस दौरान श्रद्धालुओं की सेवा में आयोजन समिति और स्थानीय लोग जुटे रहते हैं।
🔥हर वर्ग के सहयोग से सफल होता है आयोजन🔥
वार्ड पार्षद संजय ने बताया कि राउत पारा में मां दुर्गा के आयोजन को हर वर्ग का विशेष सहयोग मिलता है। युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक सभी अपनी-अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं। सामूहिक सहयोग और आपसी सद्भाव के कारण ही करीब साढ़े तीन दशक से यह धार्मिक परंपरा निरंतर आगे बढ़ रही है।
राउत पारा का दुर्गोत्सव आज आस्था, सेवा और सामाजिक एकजुटता का ऐसा उदाहरण बन गया है, जहां मां दुर्गा की आराधना के साथ-साथ लोगों के बीच भाईचारे और सहयोग की भावना भी मजबूत होती है। नवरात्रि के इन पावन दिनों में माता के जयकारों, संध्या आरती और महाप्रसाद की परंपरा से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठता है।