फागुन पर्व के बाद माँ भद्रकाली की छत्र धाम लौटी, नगरवासियों ने जगह-जगह फूल बिछाकर किया भव्य स्वागत ।
रिपोटर- सिरोज विश्वकर्मा
बीजापुर-फागुन पर्व के समापन के बाद माँ भद्रकाली की पवित्र छत्र अपने धाम वापस लौटी। इस अवसर पर नगरवासियों में भारी उत्साह और श्रद्धा देखने को मिली। माता के आगमन पर श्रद्धालुओं ने सड़क पर जगह-जगह फूल बिछाकर उनका भव्य स्वागत किया।
जैसे ही माँ की छत्र नगर में प्रवेश हुई, भक्तों ने जयकारों के साथ वातावरण को भक्तिमय बना दिया। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर माता के प्रति अपनी आस्था प्रकट की। पूरे मार्ग को फूलों से सजाया गया, जिससे माहौल अत्यंत मनोहारी और धार्मिक उत्साह से भरा दिखाई दिया।
नगरवासियों का मानना है कि माँ भद्रकाली की कृपा से क्षेत्र में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है। इसी श्रद्धा के चलते हर वर्ष फागुन पर्व के बाद जब माँ की छत्र अपने धाम लौटती है, तो नगरवासी पूरे हर्षोल्लास के साथ उनका स्वागत करते हैं।
इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और सभी ने माता से क्षेत्र की खुशहाली व मंगलकामना की प्रार्थना की। पूरा नगर जयकारों और भक्ति गीतों से गूंज उठा, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। यात्रा में छै मंदिरों की माताओं को मेले में ले जाया गया जहां भद्रकाली से भद्रकाली माता ‘ इलमिड़ी से कनका दुर्गा एवं नवदुर्गा माता’ जैतालुर से चंडीका माता एरमनार से सारक्का समक्का माता तोयनार से भवानी माता । इस कार्यक्रम के प्रमुख संत स्वामी प्रेम स्वरूपानंद सरस्वती जी रिटायर शिक्षक रवि शंकर शुक्ला जी , भद्रकाली माता के दो प्रमुख पुजारी लक्ष्मैया सूरे ‘ एवं अल्लैमा कुरसम सामुहिक ग्राम वासी एवं कुरसम एकैना । वहीं माँझी गुड़ा मंदिर से पुजारी कामेश्वर इलमिड़ी से चंदु पुनेम ‘ जैतालुर के प्रमुख पुजारी अक्षय कोरसा ‘ . तोयनार के पुजारी विनोद गावड़े यरमनार के प्रमुख पुजारी शेखराज रहे मौजुद । माताओं का प्रस्थान दंतेवाड़ा मेले में 28 तारिक सुबह 9 बजे मंदिरों में पुजा पाठ पश्चात हुआ । एवं आगमन 5 तारिक को 12 बजे पुजा के बाद हुआ । जहाँ दंतेवाड़ा से मुख्य पुजारी जिया बाबा के पुजा पाठ के बाद हुआ ।