लखमा ने दिया पूर्व मंत्री महेश गागड़ा को धन्यवाद ।
महेश की संवेदनशील पहल — दिव्यांग लखमा को मिली नई ज़िंदगी
सोशल मीडिया की खबर बनी सहारा, माओवाद प्रभावित गांव तक पहुँची मदद
बीजापुर|दिनांक-09.11.2025
कभी पहाड़ियों के सन्नाटे में अपनी बेबसी के साथ ज़िंदगी गुज़ारने वाला मड़कम लखमा अब मुस्कुराता है।
जिस रास्ते पर वह कभी ज़मीन पर रेंगते हुए चलता था,
अब उसी रास्ते पर ई–ट्राईसाइकिल के पहिए घूम रहे हैं । उम्मीद और आत्मनिर्भरता के।
यह बदलाव आया पूर्व मंत्री महेश गागड़ा की संवेदनशीलता से।
सोशल मीडिया पर तेलंगाना के एक पत्रकार द्वारा चलाई गई खबर में
लखमा की तस्वीरें और उसकी लाचारी देख गागड़ा ने बिना देर किए बीजापुर के माओवादी प्रभावित पामेड़ क्षेत्र के कौर गट्टा गांव तक पहुंचने का फैसला किया।और वहीं, उन्होंने दिव्यांग लखमा को ई–ट्राईसाइकिल भेंट की।
अब ज़िंदगी रुकती नहीं, चलती है_
कक्षा तीसरी में पढ़ाई के दौरान हुए हादसे के बाद लखमा का जीवन ठहर-सा गया था।
पिता ने साइकिल के टूटे चक्कों से उसे चलाने की कोशिश की,पर हालात और हालात की दूरी — दोनों बहुत बड़ी थीं।
आज, जब लखमा अपनी नई साइकिल पर निकला तो उसका चेहरा वही कहानी कहता है जो शब्दों में नहीं कही जा सकती।
वह कहता है अब मैं अपने दम पर चल सकता हूँ,मुझे किसी का सहारा नहीं चाहिए।
महेश गागड़ा ने कहा —
अगर एक छोटी पहल से किसी की ज़िंदगी बदल सकती है,
तो यही असली राजनीति है सेवा की।
ई–ट्राईसाइकिल सिर्फ एक उपहार नहीं, बल्कि उस भरोसे की गाड़ी है जो बीजापुर जैसे इलाकों में धीरे–धीरे लौट रही है।
जहाँ अब भी नक्सल असर, दूरी और अभाव हैं, वहीं यह कहानी बताती है कि इंसानियत के लिए कोई इलाका बहुत दूर नहीं होता।