🔥छह माह बाद भी समर कैंप के शिक्षकों को नहीं मिला मेहनताना, प्रमाण पत्र और सम्मान से नहीं चला काम!🔥
🔥एक माह तक बच्चों को कला, संगीत और नृत्य का प्रशिक्षण देने वाले शिक्षक भुगतान के लिए भटकने को मजबूर, जिला पंचायत अधिकारी नम्रता चौबे से लगाई गुहार🔥
बीजापुर
ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान बच्चों की प्रतिभा को निखारने और उनकी रचनात्मक क्षमता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित समर कैंप में अपनी सेवाएं देने वाले शिक्षकों को अब तक मेहनताना नहीं मिल पाया है। हैरानी की बात यह है कि समर कैंप समाप्त हुए करीब छह माह बीत चुके हैं, लेकिन शिक्षकों को उनके मानदेय की राशि का इंतजार है।
समर कैंप के दौरान शिक्षकों ने लगभग एक माह तक बच्चों को विभिन्न विधाओं का प्रशिक्षण दिया।
इसमें रंगोली, चित्रकला, संगीत, वादन, गायन, नृत्य सहित कई रचनात्मक एवं ज्ञानवर्धक गतिविधियां शामिल थीं।
शिक्षकों ने पूरे उत्साह और समर्पण के साथ बच्चों को प्रशिक्षण देकर उनकी छिपी प्रतिभा को सामने लाने का प्रयास किया।
इस आयोजन में योगदान देने वाले शिक्षकों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित भी किया गया।
उस समय शिक्षकों को बताया गया था कि एक माह की सेवा के बदले प्रत्येक शिक्षक को लगभग 15 से 18 हजार रुपये तक का मानदेय दिया जाएगा। लेकिन विडंबना यह है कि कार्यक्रम संपन्न होने के छह माह बाद भी यह राशि शिक्षकों के खातों तक नहीं पहुंची है।
लंबे इंतजार और बार-बार की उम्मीद के बाद आखिरकार समर कैंप में अपनी सेवाएं देने वाले शिक्षक जिला पंचायत कार्यालय पहुंचे और जिला पंचायत अधिकारी नम्रता चौबे से मुलाकात कर अपनी समस्या रखी। शिक्षकों ने उन्हें बताया कि उन्होंने पूरी जिम्मेदारी के साथ बच्चों को प्रशिक्षण दिया, लेकिन अब तक उनके परिश्रम का भुगतान नहीं किया गया है।
शिक्षकों की समस्या सुनने के बाद जिला पंचायत अधिकारी नम्रता चौबे ने उन्हें आश्वासन दिया कि जल्द ही उनके मेहनताने का भुगतान कराया जाएगा।
अब सवाल यह है कि बच्चों के भविष्य को संवारने में एक माह तक अपना समय और हुनर लगाने वाले
शिक्षकों को अपने ही मेहनताने के लिए छह माह तक इंतजार क्यों करना पड़ा?
आखिर भुगतान में देरी की वजह क्या है और जिम्मेदार विभाग ने अब तक इस दिशा में ठोस पहल क्यों नहीं की?
शिक्षकों को प्रमाण पत्र और सम्मान देना सराहनीय है, लेकिन उनके श्रम का उचित पारिश्रमिक समय पर मिलना भी उतना ही जरूरी है। अब
शिक्षक जिला पंचायत अधिकारी के आश्वासन के बाद भुगतान का इंतजार कर रहे हैं।
देखना होगा कि यह आश्वासन कब हकीकत में बदलता है और शिक्षकों को उनकी मेहनत की कमाई कब मिलती है।