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🔥मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शिक्षिका एवं कवयित्री पूनम वासम को लिखा आत्मीय पत्र, बस्तर की संस्कृति और साहित्यिक योगदान की सराहना🔥

🔥बस्तर की प्रकृति, आदिवासी जीवन और लोकपरंपराओं को कविता में सहेज रहीं पूनम वासम; मुख्यमंत्री ने कहा—आपका लेखन युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत🔥

बीजापुर।

बस्तर की माटी, आदिवासी जीवन, लोकसंस्कृति और प्रकृति की संवेदनाओं को अपनी कविताओं में जीवंत रूप देने वाली ‘

बीजापुर की शिक्षिका एवं कवयित्री पूनम वासम को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर आत्मीय पत्र लिखकर बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।

मुख्यमंत्री के इस पत्र में पूनम वासम के शैक्षणिक एवं साहित्यिक योगदान की विशेष रूप से सराहना की गई है। यह बीजापुर सहित पूरे बस्तर के साहित्यिक जगत के लिए गौरव का विषय है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि पूनम वासम शिक्षिका के रूप में बच्चों के बीच काम करते हुए उनके जीवन, परिवेश और अनुभवों को समझती हैं तथा इन्हीं संवेदनाओं को अपनी लेखनी में स्थान देती हैं। बच्चों की शिक्षा में स्थानीय पेड़-पौधों, बोली और आसपास के जीवन को जोड़ने की उनकी सोच को मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से सराहनीय बताया।

पूनम वासम का कविता संग्रह ‘मछलियाँ गायेंगी एक दिन पंडुमगीत’ भी मुख्यमंत्री के पत्र में विशेष चर्चा का विषय रहा।

उन्होंने कहा कि इस कविता संग्रह में बस्तर की प्रकृति, आदिवासी जीवन और अपनी सांस्कृतिक पहचान के प्रति गहरा लगाव अभिव्यक्त हुआ है। जंगल, नदियों और लोकपरंपराओं से जुड़े अनुभवों को कविता के माध्यम से सहेजकर पूनम उन जीवन प्रसंगों को पाठकों तक पहुंचा रही हैं, जिनकी बातें अक्सर अनसुनी रह जाती हैं।

मुख्यमंत्री ने पूनम वासम को मिले पुनर्नवा पुरस्कार का उल्लेख करते हुए इसे उनके साहित्यिक कार्य की महत्वपूर्ण पहचान बताया।

उन्होंने कहा कि बस्तर के अनुभवों का देश के साहित्यिक मंचों तक पहुंचना पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव की बात है। उनकी साहित्यिक यात्रा स्थानीय भाषा और परिवेश से जुड़कर लेखन करने वाले युवाओं का हौसला बढ़ाएगी।

पत्र में मुख्यमंत्री ने अपने जनजातीय परिवेश का उल्लेख करते हुए कहा कि भाषा के साथ बुजुर्गों की स्मृतियां, लोककथाएं और जीवन का संचित ज्ञान जुड़ा होता है। इन्हें अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में शिक्षकों और साहित्यकारों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकास भी, विरासत भी’ के विचार से पूनम वासम के कार्यों का सहज जुड़ाव भी बताया।

मुख्यमंत्री ने विकसित भारत 2047 और विकसित छत्तीसगढ़ 2047 की परिकल्पना में आदिवासी समाज के अनुभवों, महिलाओं और युवाओं के विचारों तथा स्थानीय ज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। साथ ही उम्मीद जताई कि पूनम वासम की शिक्षा और साहित्य की साधना इस दिशा में निरंतर सार्थक योगदान देती रहेगी।

मुख्यमंत्री का यह आत्मीय पत्र पूनम वासम के साहित्यिक सफर को मिली एक महत्वपूर्ण पहचान के रूप में देखा जा रहा है। बस्तर की लोकसंस्कृति, जनजातीय जीवन और स्थानीय अस्मिता को अपनी कविताओं के माध्यम से राष्ट्रीय साहित्यिक विमर्श तक पहुंचाने वाली पूनम वासम आज क्षेत्र की उभरती साहित्यिक पहचान के रूप में अपनी अलग जगह बना रही हैं।

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