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🔥फार्मासिस्ट के घर उपचार के बाद 11 वर्षीय छात्र की मौत, इलाज और दवा की डोज पर उठे सवाल🔥

🔥बीएमओ ने जताई जापानी इंसेफेलाइटिस की आशंका, कहा—जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा मौत का वास्तविक कारण🔥

बीजापुर/भैरमगढ़

 भैरमगढ़ क्षेत्र के तालनार निवासी 11 वर्षीय छात्र आर्यन ओयाम की उपचार के दौरान मौत के बाद मामले ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आर्यन भैरमगढ़ स्थित निर्मल विद्यालय में अध्ययनरत था। परिजनों के मुताबिक तबीयत बिगड़ने पर उसे भैरमगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ फार्मासिस्ट धर्मेंद्र सिंह चंदेल के घर उपचार के लिए ले जाया गया था। उपचार के बाद बच्चे की हालत बिगड़ने पर उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर स्थिति को देखते हुए रेफर किया गया। इसके बाद बच्चे की मौत हो गई।

घटना के बाद उपचार के दौरान दी गई दवाओं और उनकी मात्रा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, दवा की अधिक मात्रा दिए जाने या दवा के रिएक्शन से मौत होने की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मौत का वास्तविक कारण किसी बीमारी, दवा के प्रभाव अथवा अन्य चिकित्सकीय वजह से हुआ, यह जांच और चिकित्सकीय रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

रात करीब 9.25 बजे अस्पताल लाया गया था बच्चा ।

भैरमगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी बीएमओ डॉ. रमेश तिग्गा के अनुसार 26 सितंबर की रात करीब 9.25 बजे बच्चे को अस्पताल लाया गया था। अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे उच्च चिकित्सा केंद्र के लिए रेफर किया गया।

बीएमओ ने यह भी बताया कि बच्चे के मामले में जापानी इंसेफेलाइटिस (JE) की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, बीमारी की पुष्टि जांच रिपोर्ट के बाद ही होगी। ऐसे में मौत के कारण को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले चिकित्सकीय जांच रिपोर्ट का इंतजार जरूरी है।

दवा की डोज बनी जांच का अहम बिंदु ?

आर्यन की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल उपचार के दौरान दी गई दवाओं और उनकी निर्धारित मात्रा को लेकर उठ रहा है। क्षेत्र में यह चर्चा है कि बच्चे को दवा की अधिक मात्रा दी गई हो सकती है, लेकिन इस दावे की फिलहाल कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

ऐसे में यह महत्वपूर्ण होगा कि उपचार के दौरान बच्चे को कौन-कौन सी दवाएं दी गईं, उनकी कितनी मात्रा दी गई, किस समय दी गईं और उस समय बच्चे की चिकित्सकीय स्थिति क्या थी—इन सभी बिंदुओं की जांच की जाए।

परिजनों ने जताई समय पर बेहतर इलाज नहीं मिलने की आशंका ?

मृतक छात्र के बड़े पिता ने बताया कि बच्चे की तबीयत खराब होने पर उसे फार्मासिस्ट धर्मेंद्र चंदेल के घर उपचार के लिए ले जाया गया था।

परिजनों का कहना है कि बच्चे की हालत बिगड़ने के बाद उसे अस्पताल लाया गया और बाद में रेफर किया गया। परिवार का मानना है कि यदि बच्चे को समय रहते उच्च चिकित्सा सुविधा मिल जाती तो संभवतः स्थिति अलग हो सकती थी।

हालांकि, यह परिजनों की आशंका है और इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

सरकारी फार्मासिस्ट के निजी आवास पर उपचार को लेकर भी सवाल ?

इस घटना के बाद एक अन्य महत्वपूर्ण सवाल यह भी उठ रहा है कि शासकीय स्वास्थ्य केंद्र में फार्मासिस्ट के पद पर कार्यरत कर्मचारी द्वारा निजी आवास पर मरीजों का उपचार किन परिस्थितियों और किन नियमों के तहत किया जा रहा था।

स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी है कि धर्मेंद्र सिंह चंदेल ड्यूटी के बाद अपने निवास पर मरीजों को देखते हैं। हालांकि, इस संबंध में नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं, यह विभागीय जांच का विषय है। मामले की निष्पक्ष जांच होने पर ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

11 साल के आर्यन की मौत से गांव में शोक😭😭

आर्यन की मौत की खबर के बाद तालनार के स्कूलपारा में शोक का माहौल है। ग्रामीणों और परिजनों ने मामले की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि जांच में उपचार के दौरान दी गई दवाओं, उनकी मात्रा, बच्चे की बीमारी, अस्पताल पहुंचने में लगे समय और रेफर किए जाने की पूरी प्रक्रिया को शामिल किया जाना चाहिए। यदि जांच में किसी स्तर पर चिकित्सकीय लापरवाही अथवा नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

फार्मासिस्ट के घर इलाज के बाद 11 साल के बच्चे की मौत!

दवा की डोज पर सवाल, JE की आशंक—जांच के बाद खुलेगा मौत का राज!

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