सरेंडर नक्सली कमाण्ड़र हेमला विज्जा ने कहा-मुरदण्ड़ा में सी0आर0पी0एफ0 पर एम्बुश की विफलता ने नक्सली नेतृत्व को मानसिक रूप से गहरा आघात पहुंचाया व भविश्य की रणनीति बदलने पर मजबुर कर दिया ।
दिनांक 08/07/2025 को मुरदण्ड़ा के पास बायगुड़ा के जंगलों में गायगोठान के पास नक्सलियों के लगभग सभी बड़े कमाण्डर्स की मौजूदगी में भारी संख्या में नक्सलियों ने 229 वीं वाहिनी की एक छोटी टुकड़ी, लगभग 14 जवान, जो अन्य टुकडियों के साथ । आर0एस0ओ0 ड्यूटी में थी, पर जवानो को जान से मारने एवं हथियार लुटने के उद्देष्य से घात लगाकर हमला किया था। सरैण्डर होने के बाद प्लाटुन संख्या-9 व 10 के इंचार्ज एवं दक्षिणी बस्तर ‘ डी0बी0सी0एम0 हेमला विज्जा ने दिनांक 08/07/2025 को मुरदण्ड़ा की घटना के बारे में बताया कि हमने पूरी सावधानी के साथ एरिया को जांचकर एंबुश लगाया था जिसमें हमारे पास घने जंगल के अलावा बड़ा नाला व ऊँची-नीची जमीनी बनावट हमें फोर्स पर हमला करने के लिए सही व्यवस्था दे रही थी साथ ही आवश्यकता पड़ने पर नाला के अंदर से निकलने की व्यवस्था भी थी। हमने पूरी तैयारी के साथ घटना स्थल को तीन तरफ से घेरा हुआ था। मुख्य हमावर पार्टी में स्वयं मैं, उधम सिंह, अरूण माडकम, रायनुकुरशम, जयमान काडियम व अन्य कमांडरों के साथ घटना स्थल के दक्षिण दिषा में था। वहीं घटना स्थल के उत्तर दिशा में वेल्ला मोडियम, आकाश हेमला, प्रशांत, के साथ अपनी टीम के साथ पीछे से घेरा डाला हुआ था। साथ ही एक पार्टी दक्षिण-पूर्व दिशा में दूसरी पार्टी सी0आर0पी0एफ0 बल पार्टियों की मद्द के लिए आने से रोकने को लगायी थी। एक पार्टी नाले के अंदर से सी0आर0पी0एफ0 बल पर पीछे से फायर करने को रखी हुई थी। हमारा इरादा बल की टुकड़ी एवं कोई मद्द आये तो उनको घेरकर मारने एवं हथियार लूटने का था। हमने पर्याप्त मात्रा में बी0जी0एल0, आई0ई0डी0 एवं हथियार, एम्यूनेशन ले रखे थे। हम बल की टुकड़ी के हर मूवमेंट को बड़ी सतर्कता से देख रहे थे। जैसे ही पार्टी हमारे निशाने पर आई, हमने फायरिंग के साथ, आई0ई0डी0 ब्लास्ट किये ताकि ज्यादा से ज्यादा नुकशान पहँचा सके एवं सी0आर0पी0एफ0 वाले घबराकर भागें और हम मार सकें। लेकिन मैंने देखा सी0आर0पी0एफ0 जवानों ने भी तुरन्त हमारे उपर फायरिंग शुरू कर दी थी। फिर हमने चमका देते हुए 2/3 तरफ से फायर डाला एवं उनके ऊपर बी0जी0एल0 से भी फायर किये। हमें अंदाजा था कि मुरदण्ड़ा कैम्प से भी सहायता में अतिरिक्त बल आ सकता है तो हमने पहले ही एक टीम उस ओर लगा रखी थी। हमे पता लग गया था कि कुछ जवान घायल हुये हैं साथ ही फायर भी कर रहे हैं तो हमने सोचा कि कुछ ही देर में अब इनका एम्यूने शन खत्म हो जायेगा और हम बारी-बारी से अलग-अलग दिशा से फायरिंग कर एंगेज कर रहे थे। इसी दौरान अचानक हमारे पीछे तेज धमाका हुआ और पता चला कि अतिरिक्त बल हमारे पीछे की दिषा में पहुँचकर मोर्टार बम्ब से फायर शुरू कर दिया है तो अचानक से हम कुछ सोच नहीं पाये। पीछे से बम व हथियारों से फायर बड़ी तेजी से आने लगा अचानक हमारे ऊपर इस बमबारी से हमारे साथी घबरा गये व तेजी से नाले के अंदर से पीछे की ओर भाग गये। वेल्ला की टीम से भी मेरा संपर्क टूट गया था। बाद में पता चला कि तेज धमाके व फायरिंग की आवाज के साथ सी0आर0पी0एफ0 कार्मिको के यह चिल्लाने से कि हमारे साथ में बड़ी टीम पहुंच गयी है डटे रहो। वेल्ला मोडियम टीम भी उत्तर दिषा में ही तेजी से वापस हो गयी। इसी दौरान मेरे साथी मरकम को गोली लगी थी जिसे हम उठा कर ले गये थे। सरैण्डर नक्सली कमांडर, हेमला विज्जा ने कहा मुरदण्डा में सी0आर0पी0एफ0 टुकड़ी पर हमले की विफलता ने नक्सली नेतृत्व को गहरा आघात लगा व मानसिक रूप से सरैण्डर की भूमिका की नींव रखी।
चौंका देने वाला था सी0आर0पी0एफ0 के सहायता दल का पहुँचना। सी0आर0पी0एफ0 का सहायता दल हमें चकमा देकर जिस तेजी से हमारे पीछे पहुँचकर अचानक फायर करने लगा उस पर हमें यकीन ही नहीं हो पा रहा था। फायरिंग शुरू होने के 10/15 मिनट के बाद ही सहायता दल अपनी टीम के बचाव में पहुँच गया। सबसे बड़ी बात यह थी कि हमने एक टुकड़ी सहायता दल को रोकने के लिए लगा रखी थी जहां से उनके आने की पूरी संभावना थी। लेकिन आष्चर्य तब हुआ जब हमारी उस टुकड़ी को चमका देकर सी0आर0पी0एफ0 सहायता दल ने सीधे हम पर पीछे की तरफ से फायर डालना शुरू कर दिया। हमने खुद को घिरा हुआ पाया व एक साथी को गोली लगी तो हम तुरंत नाले के अंदर से भाग निकले। हमारे अनुभव के अनुसार सी0आर0पी0एफ0 क्या किसी भी बल का इतनी तेजी से सहायता दल नही पहुंचा है लेकिन ये सहायता दल इतनी तेजी से हमें चौंकाते हुये पहुंचा कि हम हक्के-बक्के रह गये थे। ज्ञात हो कि सहायता दल 229 वी वाहिनी के अधिकारी मुख्यार सिंह लेकर पहुंचे थे जिन्होंने बड़ी बहादुरी, पराक्रम व सटीक योजना से नक्सलियों को चकमा देते हुये जंगल में नकसल पार्टी के पीछे पहुंचकर पीछे से घेर कर फायर डाला जिससे नक्सलियों को मुश्किल से जान बचाकर भागना पड़ा एवं वे सभी जंगल में तितर-बितर हो गये थे। इसके साथ ही सी0आर0पी0एफ0 टुकड़ी में मौजुद जवानों ने घायल होने के बावजुद भी बहादुरी से मुकाबला किया था। इससे सी0आर0पी0एफ0 जवानो की सुरक्षा के साथ साथ हथियारों को भी सुरक्षा जा सकी।
मुरदण्डा की विफलता हमारे नेतृत्व के लिए चिंताजनक एवं रणनीतिक बदलाव का कारण बनी। हेमला विज्जा ने बताया मुरदण्डा की घेराबन्दी हमारे साथियों द्वारा बड़ी सूझबूझ एवं बड़ी संख्या में लगाई गयी थी जिसमें हमारे लगभग 70 से ऊपर की संख्या में साथी थे। फिर भी जिस तेजी, चालाकी एवं बहादुरी से सी0आर0पी0एफ ने हमें घेरा एवं हमें भागने पर मजबूर कर दिया था उसने हमारे नेतृत्व को झकझोर दिया था। हम सबने तीन दिन बाद मीटिंग की और सोचा कि आगे अब ‘ सी0आर0पी0एफ0 या पुलिस बलों के साथ लड़ना मुश्किल होता जा रहा है क्योंकि कैम्पों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। इतना बड़ा सुनियोजित हमला एवं मजबूत स्थिति में होते हुये भी हमें जान बचाकर भागना पड़ा तो इसके बाद हम ज्यादा से ज्यादा आई0ई0डी0 के प्रयोग एवं छोटे-छोटे ग्रुप में रहकर कार्यवाही के बारे में विचार करने लगे। वहीं कुछ साथी अब आगे लड़ने की मंसा में संदेह करने लगे। उसके बाद हम लोगों में अलग-अलग विचार उठने लगे। यहां तक कि सरैण्डर करने के विचार उसके बाद से ही शुरू होने लग गये थे।