आपसी विवाद करोड़ों के भ्रष्टाचार का खुलासा यदि “आरोप ” सिद्ध हुआ ? तो क्या ?आरोपी जायेंगें जेल या मिलेगी बेल ।या होगा लीपापोती का खेल ।
सी बी आई करे जाँच जनता की माँग ‘
सी मार्ट गारमेंट फैक्ट्री विवाद पहुंचा कलेक्टर कार्यालय, एफपीओ ने लगाए गंभीर आरोप ।
बीजापुर।
इन्द्रावती फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी प्रा.लि. (एफपीओ) और जिला प्रशासन के बीच सी-मार्ट व गारमेंट फैक्ट्री संचालन को लेकर विवाद अब कलेक्टर कार्यालय पहुंच गया है।
संस्था ने ज्ञापन सौंपते हुए किसानों के अधिकार छीनने, आर्थिक अनियमितता और कथित भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। एफपीओ ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
एफपीओ का कहना है कि वर्ष 2022 से संस्था किसानों और स्थानीय उत्पादकों के हित में काम कर रही थी तथा वर्ष 2023 से सी-मार्ट और गारमेंट फैक्ट्री का संचालन भी संस्था के माध्यम से किया जा रहा था। संस्था के अनुसार तीन पक्षों के बीच हुए एमओयू में लाभ-हानि साझा करने का प्रावधान था, लेकिन एफपीओ को उसका उचित लाभ नहीं मिला।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2022 से 2025 तक ब्लैंक चेक पर हस्ताक्षर करवाकर राशि निकाली गई।
विरोध करने पर संस्था को बैंक सिग्नेटरी से हटा दिया गया।
एफपीओ ने सवाल उठाया है कि जब एमओयू, दस्तावेज, बिजली कनेक्शन और संचालन संबंधी आधार संस्था के नाम पर हैं,
तो फिर ‘
गौरव पांडेय को किस आधार पर सिग्नेटरी बनाया गया।
संस्था ने यह भी पूछा है कि क्या तीसरे पक्ष के अधिकार किसी अन्य व्यक्ति को सौंपे जा रहे हैं।
एफपीओ ने कौशल विकास विभाग पर बिना अनुमति दूसरा जीएसटी तैयार कराने का आरोप भी लगाया है।
संस्था का दावा है कि योजनाबद्ध तरीके से किसानों के संगठन को हटाकर किसी अन्य पक्ष को लाभ पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
Iसंस्था ने सी-मार्ट भवन की जर्जर स्थिति का भी उल्लेख किया है।
एफपीओ के मुताबिक भवन की छत से लगातार पीओपी गिरता रहा, जिसकी मरम्मत संस्था अपने खर्च पर कराती रही।
लगातार खर्च और संसाधनों की कमी के चलते संस्था आर्थिक रूप से कमजोर होती गई, जिससे कर्मचारियों के मानदेय और संचालन पर असर पड़ा।
एफपीओ ने बताया कि बैंक ऋण लेने के लिए लीज एग्रीमेंट आवश्यक था। इसके लिए जिला पंचायत और प्रशासन को कई बार आवेदन दिए गए, लेकिन केवल आश्वासन मिलता रहा।
बाद में प्रशासन द्वारा सी-मार्ट संचालन के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की जानकारी मिलने पर किसानों में नाराजगी बढ़ गई।
संस्था के अनुसार फरवरी 2026 में जिला पंचायत अधिकारियों ने बंद पड़े सी-मार्ट का निरीक्षण कर डेमो उत्पादों को एक्सपायरी बताते हुए नोटिस जारी किया ।
और बिना संतोषजनक जवाब का अवसर दिए परिसर खाली कराने की कार्रवाई शुरू कर दी। इसके खिलाफ एफपीओ ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जहां से संस्था को स्थगन आदेश मिला है।
एफपीओ ने यह भी दावा किया कि जिस भूमि पर गारमेंट फैक्ट्री संचालित हो रही है, उसकी ग्राम पंचायत अनापत्ति, दस्तावेज और बिजली बिल इन्द्रावती एफपीओ के नाम पर हैं, इसके बावजूद संचालन से उन्हें अलग कर दिया गया।
Iदेखना दिलचस्प होगा कितना फायदा हुआ सी मार्ट को या कितना फायदा हुआ गारमेंट फैक्ट्री को ।- आम जनता I
अंत में संस्था ने कलेक्टर से पूरे मामले की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच कराने, दोषियों पर कार्रवाई करने, सी-मार्ट भवन की मरम्मत कराने तथा किसानों और स्थानीय उत्पादकों के हित में एफपीओ को पुनः संचालन का अवसर देने की मांग की है।