सरकार ने समझा आदिवासियों का दर्द वर्षों बाद मिलेगा आदिवासियों को उनके हक की जमीन का अधिकार”
बीजापुर वनमण्डल अन्तर्गत आने वाले अतिसंवेदनशील परिक्षेत्र गंगालूर, पामेड, आवापल्ली, भैरमगढ, भोपालपटनम क्षेत्रों से बीजापुर वनमण्डल सामान्य द्वारा कुल 697 ग्रामों में कुल 7453 आवेदन प्राप्त किया गया है जिसका जिला प्रशासन के साथ संयुक्त स्थल सत्यापन का कार्य चल रहा है
लंबे समय से नक्सल समस्या से ग्रस्त होने के कारण कावडगांव, पीडिया, मुरदोण्डी, इटेनार, डोडी तुमनार, गमपुर, डोंगरी पालनार, गूगली, करका, कुएन, एडसमेटा, कोरचुकी, तोंडका, मेटागुडा, एर्रापल्ली, पेदाचन्दा, रासपल्ली, बोटेलंका, पिनाचन्दा, बेदरे, सेन्ड्रा, पिल्लूर, चिंगेर, बेलनार, बांगोली, मर्रामेटा, बैल, बडेपल्ली, बुड़गा, पोनडवाया, ग्रामों में शासन के नक्सल दमन निति से आदिवासी परिवारों के लिए एक ऐतिहासिक और राहत भरा कदम सामने आया है, वर्षों के बाद आदिवासियों को उनके हक की जमीन और वैधानिक अधिकार मिल रहा है शासन का यह निर्णय आदिवासी सामुदाय के आर्थिक एवं सांस्कृतिक साशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। शासन द्वारापुनर्वास योजनाओं, रोजगार के अवसरों और जन कल्याणकारी कार्यक्रमों के माध्यम से मुख्य धारा से जोड़ने के लिये प्रेरित किया जा रहा है
इस पहल के अन्तर्गत वन अधिकार अधिनियम के तहत् पात्र आदिवासी परिवारों को भूमि अधिकार पत्र (पट्टा) प्रदाय किया जा रहा है। इनसे न केवल उनकी भूमि पर वन अधिकार की मान्यता सुनिश्चित होगी बल्कि आजीविका, कृषि और विकास की नई संभावनांए खुलेंगी।
प्रशासन द्वारा पुरी प्रक्रिया पारदर्शी एवं सरल बनाया गया है, ताकि वास्तविक हितग्राहियों एवं भूमिहीन को समयबद्ध रूप से लाभ मिल सके। ग्राम सभाओं की भूमिका को सशक्त करते हुए दावा का सत्यापन किया जा रहा है, एवं पात्र प्रकरणों का शीघ्र निराकरण करना सुनिश्चित किया जा रहा है।
यह कदम आदिवासी समाज के लिए जल, जंगल, जमीन के पारंपरिक अधिकारों को सम्मान प्रदान करता है। वन विभाग और गांव के ग्रामीणों के साथ कदम से कदम मिलाकर वनों का सरंक्षण एवं संर्वद्धन का काम करेंगें। प्रशासन ने अपील की है कि सभी पात्र हितग्राही आगे आके इस प्रक्रिया का लाभ लें तथा आवश्यक दस्तावेज समय पर प्रस्तुत कर सकें।